महिला बन सकती है पी एम इस बार

मुद्दा विहीन इस चुनाव में एक बात तो बहुत साफ़ साफ़ दिखायी दे रही है कि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने जा रहा है। चुनावी दौड़ में सबसे आगे का दम भरने वाली भाजपा खुद इस परीक्षा में ३३ नंबर लाने के लिए जूझ रही है यानी २७२ का आंकड़ा। जितने नंबर लाने के लिए हम परीक्षा में मेहनत करते हैं नंबर उससे कम ही आते हैं। इसी लिए भाजपा को अपनी कमियां अभी से दिखायी देने लगी हैं। कांग्रेस भी अपनी छवि पर लगे दागों को धोने और एक बच्चे को आगे करके कुछ हासिल करने की जुगत में लगी है यानि बहुमत की उम्मीद उसे भी नहीं है। तीसरा मोचा हवा में तैर रहा है जिसमे कोई दम नहीं है। वोट कटवा दलों की कोई बिसात नहीं है। केंद्र में खिचड़ी सरकार के आसार बन रहे हैं। जिसमे बसपा सपा और तमाम छुटभैये दलों की भूमिका अहम होगी। इसलिए इसमें ऐसा लग रहा है कि न तो मोदी न मुलायम पीएम बनेगी महिला चाहे इसके लिए मीराकुमार को आगे लाया जाए या फिर मायावती पर दांव खेला जाए। मीरा और माया के साथ दलित फैक्टर रहेगा और ये क्रेडिट भी कांग्रेस ले जा सकती है कि हमने दलित महिला को पी एम बनाया। दूसरी स्थिति में ममता, एम जयललिता या फिर सुषमा स्वराज का नाम आ सकता है। अभी ये दूर की कोड़ी लग सकती है लेकिन एक सम्भावना तो बनती ही है। या कोई मुस्लिम नाम भी आगे आ सकता है। हालांकि इसकी गुंजाइश बहुत कम है। भारतीय झगड़ालू पार्टी के पीएम पद के दावेदार पहले लहर थे फिर तूफ़ान हुए और अब सुनामी मुझे नहीं लगता ये बहुत अच्छे विशेषण हैं जिनका उद्घोष कर के अघोषित रूप से भय और आतंक का माहौल बनाया जा रहा है। पप्पू यानी राहुल गांधी की दशा वही है कि मैया मै तो चंद्र खिलौना लैहों। उनके भाषणों में एक बच्चे का मचलना साफ़ झलकता है। मुलायम पुत्र और कुनबे के मोह में सही गलत का फर्क भूल गए हैं। बाकी के नेता डम डम डिगा डिगा मौसम भीगा भीगा बिन पिए मै तो गिरा मै तो गिरा। की दशा को प्राप्त हैं। जनता और उससे जुड़े सरोकारों के बजाय वो एक दुसरे को गंदा बताने में अमर्यादित होते जा रहे हैं। फिल्मी सितारे भी भड़ैती के कीर्तिमान बनाने में लगे हैं।वाकई  भगवान् मालिक है इस देश का। 

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