बिखराव कहाँ ले जाएगा
भाजपा के अंदर
इस समय दो
लॉबी काम कर
रही हैं एक
को नरेंद्र मोदी
लीड कर रहे
हैं और दूसरी
को जितने भी
दुखी पीड़ित पुरनके
नेता हैं वह
शह दे रहे
हैं अंदर खाने
में आजकल एक
चर्चा बड़े जोरों
पर है कि
एक बड़े नेता
जो मोदी के
उभार से नाखुश
हैं वह भाजपा
को कैसे भी
180 सीटों के इर्दगिर्द
समेटने में लगे
हैं ताकि मोदी
का उभार रोका
जा सके। दूसरे
नेता जो ब्राह्मणों
के अगुआ बताए
जाते हैं वह
ब्राम्हणों के वोट
कांग्रेस को दिलवाने
की गणित में
लगे हैं हालांकि
उनकी खुद की
सीट अभी फंसी
हुई है जिसके
लिए वह मोदी
को जिम्मेदार मान
रहे हैं। इसी
तरह लखनऊ के
एक कद्दावर नेता
जिनका शिया मुसलामानों
पर दबदबा बताया
जाता है वह
भी अंदर अंदर
यह सन्देश दे
चुके हैं कि
वोट भाजपा को
छोड़ कहीं जाए
कोई गम नहीं।
वस्तुतः भाजपा के रूठे
हुए नेतागण इमर्सन
की इन पंक्तियों
को भूल चुके
हैं कि दूसरों
को असफल बनाने
के प्रयास ही
हमें असफल बनाते
हैं। या वह
इस ओर ध्यान
नहीं देना चाहते।
कुल मिलाकर भाजपा
के जितने भी
क्रांतिवीर योद्धा हैं या
थे वह समय
के साथ चुक
गए हैं क्योंकि
वह अपने बनाए
खांचे को तोड़
नहीं पाए। मोदी
में नयापन था
लेकिन वह भी
थोथा चना बाजे
घना साबित होते
दिख रहे हैं
हालांकि चुनाव में अभी
देर है लेकिन
युद्ध के लिए
जब रणभेरी बज
चुकी है ऐसे
समय पार्टी का
बिखराव इसे कहाँ
ले जाएगा यह
वक्त बताएगा।
Comments
Post a Comment