मुख्तार के हटने के मायने
चुनावी पैंतरेबाजी के नज़रिये से अप्रैल का दूसरा बृहस्पतिवार कुछ ख़ास हो गया । अव्वल तो यह जनशक्ति की ताकत के प्रदर्शन यानी मतदान का दिन था । दूसरे पूरे देश की नजर जहां टिकी है जी हाँ मै बनारस की बात कर रहा हूँ वहां के लिए भी ये दिन ख़ास हो गया जब बाहुबली कहे जाने वाले मुख्तार अंसारी की उम्मीदवारी वापस लेने का कौमी एकता दल ने यह कहते हुए ऐलान कर दिया कि यह कुर्बानी धर्मनिरपेक्ष वोटों का विभाजन रोकने के लिए है। ये बहुत बड़ी बात है क्योंकि अजय राय की उम्मीदवारी के एलान के बाद यह कहा जा रहा था कि अजय राय यह सीट निकाल सकते हैं लेकिन मुख्तार यदि मैदान में आ गए तो दिक्कत हो जाएगी। अब जबकि मुख्तार अंसारी की उम्मीदवारी वापस हो गयी है तो मुकाबला रोचक होता दिख रहा है। खासकर मुस्लिम वोट बँटने की सम्भावना घटती नज़र आ रही है। हालांकि कौमी एकता दल ने अभी किसी को समर्थन नहीं दिया है।
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